कांच की बस में विराजमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज की पालकी व गतका रहा मुख्य आकर्षण

Published on November 22, 2025 | Views: 277

कांच की बस में विराजमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज की पालकी व गतका रहा मुख्य आकर्षण

सिख धर्म के नौवें गुरु व हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज और उनके तीन सिख भाई मती दास जी भाई सती दास जी और भाई दयाला जी के 350 साला शहीदी शताब्दी दिवस को समर्पित विशाल नगर कीर्तन आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल से शुरू होकर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित शीशगंज साहिब पर पहुंचा। सुबह 7:00 बजे अरदास के साथ नगर कीर्तन गुरुद्वारा गुरु का ताल से रवाना हुआ नगर कीर्तन में 15 से अधिक बसें और 100 से अधिक वाहनों के माध्यम से संगत गुरुद्वारा शीशगंज पहुंचा।

नगर कीर्तन की शुरुआत गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने अरदास के साथ की पालकी साहिब में विराजमान गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के आगे अरदास के साथ नगर कीर्तन शुरू हुआ सबसे पहले पंच प्यारे साहिबान और हाथों में निशान साहब लिए निशानची साहिबान वाहनों में शामिल थे ।जिसके बाद रंग-बिरंगे फूलों से सजी और कांच की बस में विराजमान गुरु महाराज की सवारी नगर कीर्तन का नेतृत्व कर रही थी जिसके बाद गुरुद्वारा गुरु का ताल के रंजीत अखाड़े के सेवादार वाहनों में सवार थे ।नगर कीर्तन आगरा मथुरा कोसी पलवल होते हुए दिल्ली पहुंच नगर कीर्तन का पूरे मार्ग में सभी जिलों में शानदार स्वागत किया गया साथ ही स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से भी नगर कीर्तन को हर जिले में सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।

संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज ने अपनी शहादत कश्मीरी ब्राह्मण की गुहार पर हिंदुत्व की रक्षा और तिलक व जानू को बचाने की खातिर दी थी आगरा मैं जहां गुरु महाराज ने अपनी गिरफ्तारी स्वयं आकर दी वहां गुरुद्वारा गुरु का ताल भव्यता के साथ सुशोभित है तो वही दिल्ली के चांदनी चौक में जहां गुरुजी और उनके तीनों सिखों भाई मती दास जी भाई सती दास जी और भाई दयाला जी को बहुत ही यातनाएं देकर शहीद किया गया । वहां आज गुरुद्वारा शीशगंज साहिब विराजमान है।गुरु महाराज के 350 में शहीदी दिवस को समर्पित करते हुए देश भर में वर्ष भर अनेक यात्राएं नगर कीर्तन और समागम किए गए 25 नवंबर को गुरु महाराज का शहीदी दिवस है इसके उपलक्ष्य में यह नगर कीर्तन निकाला गया।
मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह जस्सी ने बताया कि नगर कीर्तन आगरा से चलकर दिल्ली के लाल किला पहुंचा ।जहां से कीर्तन करते हुए नगर कीर्तन गुरुद्वारा शीशगंज साहिब चांदनी चौक तक पैदल चलते हुए पहुंचा ।नगर कीर्तन में गुरुद्वारा गुरु का ताल के रंजीत अखाड़े की ओर से गतका खेलते हुए युद्ध कला के अनेक कर्तव्य दिखाएं साथ ही पुरातन शास्त्रों का शानदार प्रदर्शन भी किया । गुरु महाराज की पालकी और रंजीत अखाड़े का गटका नगर कीर्तन को एक अलौकिक रूप दे रहा था।
नगर कीर्तन को रवानगी देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मौजूद रहे। सभी का स्वागत बाबा अमरीक सिंह ने सिरोपा पहना कर किया।नगर कीर्तन की माग की व्यवस्थाएं जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया ने संभाली ।नगर कीर्तन में मुख्य रूप से जत्थेदार अमर सिंह बंडा शाहजहांपुर, जत्थेदार सतनाम सिंह निजामाबाद, जत्थेदार पाल सिंह सितारगंज,श्री गुरु सिंह सभा माईथान के प्रधान कवलदीप सिंह ,हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह , सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह, दलजीत सिंह सेतिया ,गुरमीत सिंह सेठी, अरविंद सिंह चावला , जसपाल चावला,परमजीत सिंह मक्कड़, हरपाल सिंह, परमजीत सिंह सरना,श्याम भोजवानी प्रवीण अरोड़ा , परमात्मा सिंह अरोड़ा,पाली सेठी,बंटी ग्रोवर ,लकी सेतिया, राजू सलूजा,संजय जटाना , सतीश सिंह अरोड़ा ,बॉबी आनंद, ,रानी सिंह आदि मौजूद रहे। नगर कीर्तन में आगरा फिरोजाबाद मथुरा के साथ-साथ अलीगढ़ शाजापुर सितारगंज पीलीभीत शाहबाजपुर पीलीभीत की संगत की भी भागीदारी रही।

Category: Uttar pradesh


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