हथिनी मिया की आज़ादी का एक दशक: सर्कस में करतब दिखाने से लेकर सुरक्षित देखभाल तक का सफ़र

Published on November 29, 2025 | Views: 150

हथिनी मिया की आज़ादी का एक दशक: सर्कस में करतब दिखाने से लेकर सुरक्षित देखभाल तक का सफ़र

फरह। दस साल पहले, एक लाचार हथिनी को सर्कस के रिंग से बचाया गया था, जो सालों तक कठोर प्रदर्शन दिखाने को मजबूर थी और जिसके कारण उसके शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ा था। छोटी बच्ची के रूप में जंगल से लाई गई उस हथिनी को करतब दिखाने और कठोर प्रशिक्षण भरे जीवन में धकेल दिया गया था l मिया ने आखिरकार दर्द और दुर्व्यवहार की दुनिया को पीछे छोड़ा, जब वाइल्डलाइफ एसओएस ने उसे 2015 में तमिलनाडु से बचाया। वह क्षण उसके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जहाँ से उसे आवश्यक उपचार मिलना शुरू हुआ।

कभी सर्कस में प्रताड़ित मिया का जीवन कठोर प्रशिक्षण, अप्राकृतिक दिनचर्या और अथक शारीरिक परिश्रम से भरा था। 2015 में वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा बचाए जाने पर, वह गंभीर और लंबे समय से चली आ रही चोटों के साथ मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र लाई गई। बढ़ती उम्र संबंधित चुनौतियों से जूझते हुए, मिया की दोनों आँखों में कॉर्नियल अपारदर्शिता के लक्षण दिखाई दिए, जिसके परिणामस्वरूप उसे ठीक से दिखाई भी नहीं देता। उसके दोनों आगे के पैरों के नाखून कटी-फटी स्थिति में थे, नाखूनों की सतह खुली हुई थी और क्यूटिकल्स क्षतिग्रस्त थे, जिससे उसे सामान्य गति में चलने में भी असुविधा हो रही थी।

मिया की उपचार यात्रा धीमी और स्थिर रही है, लेकिन उल्लेखनीय है। निरंतर उपचार से, उसके क्षतिग्रस्त नाखून धीरे-धीरे ठीक होने लगे हैं। नियमित औषधीय फुट बाथ, फुट-केयर रूटीन और विशेष वृद्धावस्था देखभाल ने उसे बेहतर ढंग से और कम असुविधा के साथ अपना वजन संभालने में मदद की है।

आज, मिया उसी सर्कस से बचाई गई एक और हथिनी रिया के साथ एक बड़े बाड़े में रहती है। साथ मिलकर, वे धीरे-धीरे टहलते हुए, धूल उड़ाते हैं और अपने आस-पास के वातावरण में सुकून से अपना दिन बिताते हैं। इन आज़ादी भरे दस साल में मिया अपनी साथी रिया के साथ हर दिन का आनंद लेते हुए मौसमी व्यंजनों का लुफ्त उठाती है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "पिछले दस वर्षों में मिया को फलते-फूलते देखना दर्शाता है कि समर्पित दीर्घकालिक देखभाल से क्या हासिल किया जा सकता है। यह हमारे इस संकल्प को और भी मज़बूत करता है जिसमे ज़ंजीरों में जकड़े हर हाथी को भी वही सम्मान और आज़ादी मिले।"

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, "मिया के शुरुआती दिनों में वह अपनी नई दुनिया को लेकर सतर्क और अनिश्चित थी। अब उसे फलते-फूलते और निडर देखना बेहद सुखद है। इन दस सालों में उसने जो नया जीवन पाया है, उसमे सिर्फ़ स्वास्थ्य संबंधित ही नहीं, बल्कि एक हाथी का शांत आत्मविश्वास भी झलकता है जिसे आखिरकार सहजता से जीने की आज़ादी मिल गई है।"

वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक, डॉ. इलियाराजा ने बताया, "मिया की वृद्धावस्था देखभाल की ज़रूरतें व्यापक हैं, लेकिन वह उपचार के प्रति बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दे रही है। उसके पैरों में काफ़ी सुधार हुआ है, उसके घाव भर गए हैं, और उसका स्वास्थ्य स्थिर है। उसे आराम और विश्वास से भरा जीवन जीते देखना बेहद संतोषजनक है।"

Category: Uttar pradesh


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