बारिश एवं मौसम के बाद अब खाद के लिए लाचार हो रहे हैं किसान

Published on January 18, 2026 | Views: 328

बारिश एवं मौसम के बाद अब खाद के लिए लाचार हो रहे हैं किसान

धौलपुर किसी शायर की यह पंक्तियां गले लगाते ही गिरेबा पकड़ लेते हैं! चंद् पैसों के लिए लोग ईमा बदल लेते हैं॥
मौका परस्ती का आलम यह है जनाब।
मुरझा जाए तो फूल भी गुलिस्ता बदल देते हैं॥
शायर की ये पंक्तियां लाचार किसान के ऊपर सटीक बैठती हैं जहां बारिश एवं मौसमी मार से उभरने की कोशिश के बाद देर सबेर जब फसल की सेवा में लगा किसान पहले प्रकृति की मार झेल रहा था तथा उससे कराह रहा था किंतु अब सिस्टम की मार के आगे बेबस नजर आ रहा है पहले तो सरकारो ने एवं नीति नियंताओं ने जमीन की छाती को छलनी करने एवं उपज बढ़ाने के लिए किसानों को उर्वरको के अंधाधुंध उपयोग का आदि बना दिया और जब उर्वरकों की बैसाखी पर चलने का किसान आदि हो गया तो खाद की कमी चाहे वह वास्तविक हो अथवा सिस्टम द्वारा पैदा की गई
हो बनाकर किसान के सामने एक विकराल समस्या पैदा करती है
यूरिया खाद की भारी किल्लत एवं मारामारी व कालाबाजारी से किसान बेहद परेशान है धौलपुर जिले की बात करें तो मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगा होने से किसान लंबे अरसे से इन प्रदेशों से खाद का लेनदेन अपने स्तर पर करते रहे हैं वास्तविकता यह है कि पुलिस की प्रभावी कार्यवाही से नकली खाद के कारोबारी भूमिगत हो चुके हैं तथा नकली खाद का कारोबार पूरी तरह बंद हो चुका है
राजस्थान सरकार जहां स्वयं को किसानों का सबसे बड़ा हमदर्द बताने में कोई कोर्स नहीं छोड़ती तथा टीवी एवं अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन पर करोड़ों रुपए खर्च करती है इस सरकार के कृषि मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा 5 जनवरी को पर्याप्त खाद का भंडारण होने का दावा कर रहे थे किंतु स्थिति यथार्थ के धरातल पर बिल्कुल उल्टी नजर आ रही है किसान यूरिया के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं तथा उन्हें निर्धारित दर से दोगुनी दर पर पर उर्वरक विशेष कर यूरिया बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है यहां तक के कई किसान आपदा की इस घड़ी में इतनी कीमत देकर उड़िया खरीदने में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं उन्हें भी कहीं से पैसे का इंतजाम कर ऊंची दरो पर यूरिया खरीदने परबि बस होना पड़ रहा है पिछले दिनों रवि की फसल की बुवाई के दौरान जब किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं हुआ तो जगह-जगह किसानों को विरोध कर प्रदर्शन करना पड़ा तथा किसान सड़कों पर उतर आए इस विरोध को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को पुलिस के संरक्षण में खाद्य का वितरण कराना पड़ा जो कि किसी भी प्रजातांत्रिक देश में एक अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता जब सही समय पर किसानों को आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं हो तो किसानों का आकर्षित होना लाजमी है
किसानों का आरोप है की खाद की खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है 270 रुपए का उड़िया बाग₹450 से ₹500 तक किसानों को दिया जा रहा है विक्रेताओं द्वारा जबरन एंजाइम इत्यादि की थैली भी साथ में दी जा रही है किसानों का आरोप है एक खाद विक्रेता सीधे तौर पर खाद नहीं होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं तथा अपनी शर्तोंको मनवा कर यूरिया के बैग गुप्त स्थान से पकड़ा देते हैं
कृषि विभाग की माने तो वह सरकार के निर्देशों की अनोखेना करता नजर आ रहा है तथा खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा करते नहीं थक रहा विभाग का दावा है कि अचानक बड़ी मांग के कारण खाद की कठिनाई हो रही है किसानों का यह भी आरोप है की मांग के अनुरूप खाद उन्हें अब तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है सरकार का निगरानी का दावा भी खोखला साबित हो रहा है प्रशासन भी आंख मुड़ कर बैठने का आदि हो चुका है उधर खाद उपलब्ध नहीं होने से किसान खाद की कमी एवं भ्रष्टाचार से तरसते हैं सरकार को किसने की समस्या की ओर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि फसलों पर अपना जीवन यापन करने वाला किसान फसल भी न‌ हार बैठे।

Category: Rajasthan


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