Published on January 23, 2026 | Views: 442
आगरा: पावन जन्मभूमि आंवलखेड़ा युग निर्माण योजना के जनक और गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की जन्मस्थली, आंवलखेड़ा में बसंत पंचमी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर आयोजित विशाल गायत्री महायज्ञ में भाग लेने के लिए देश-विदेश से भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भोर से आवल खेड़ा गायत्री शक्तिपीठ परिसर में शुरू हुआ भक्तों का आगमन महायज्ञ में यज्ञ करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लेने लग गई श्रद्धालुओं ने यज्ञ करने के लिए 4 से 5 घंटे तक लाइनों में लगे रहे।
शुक्रवार सुबह से ही आंवलखेड़ा की गलियां 'गायत्री मंत्र' और 'जय गुरुदेव' के जयघोष से गुंजायमान रहीं। बसंत पंचमी, जो कि गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्मदिन माता भगवती देवी शर्मा जी का शताब्दी जन्म जयंती शताब्दी महोत्सव भी माना जाता है, के अवसर पर मंदिर और जन्मस्थली परिसर को फूलों और विद्युत झालरों से भव्य रूप से सजाया गया। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और स्वयंसेवकों ने पुख्ता इंतजाम किए थे।सामूहिक महायज्ञ और दीक्षा संस्कार महोत्सव का मुख्य आकर्षण सामूहिक गायत्री महायज्ञ रहा। यज्ञशाला में सैकड़ों कुंडों पर हजारों श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालीं और विश्व शांति की कामना की।संस्कार परंपरा: इस अवसर पर बड़ी संख्या में बच्चों का 'विद्यारंभ संस्कार' और युवाओं का 'दीक्षा संस्कार' संपन्न कराया गया।पीत वर्ण का महत्व: बसंत के प्रतीक पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालु पूरे परिसर को केसरिया रंग में रंगा हुआ दिखा रहे थे।गुरुदेव की जन्मस्थली पर नमन श्रद्धालुओं ने गुरुदेव की पावन जन्मस्थली के दर्शन किए और उस अखंड ज्योति को नमन किया, जो निरंतर जलती रहती है। कई भक्तों ने बताया कि आंवलखेड़ा आकर उन्हें असीम शांति और नई ऊर्जा की अनुभूति होती है।
व्यवस्था और सुरक्षा भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गायत्री परिवार के सैकड़ों स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला। स्थानीय थाना पुलिस प्रशासन ने भी यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किया था। महायज्ञ में आहुति देने आए श्रद्धालुओं के लिए गायत्री शक्तिपीठ परिसर आवल खेड़ा में गायत्री मंदिर परिसर में ही जलपान की व्यवस्था की गई थी जगह-जगह भंडारे और पेयजल की व्यवस्था की गई थी।
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