वृंदावन में यमुना का तांडव—लापरवाही की नाव पर सवार थी मौत

Published on April 11, 2026 | Views: 289

वृंदावन में यमुना का तांडव—लापरवाही की नाव पर सवार थी मौत

पुनीत शुक्ला: ​वृंदावन- धर्म और आस्था की नगरी वृंदावन शुक्रवार को एक ऐसी चीख से दहल उठी, जिसने भक्ति के वातावरण को मातम के काले साये में लपेट दिया। केसी घाट पर यमुना की लहरों के बीच हुआ यह नाव हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नियम-कानूनों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध संचालन और घोर मानवीय लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। श्रद्धालुओं से भरी एक मोटरबोट पीपा पुल (पेंटून ब्रिज) से टकराकर पलट गई, जिससे दर्जनों जिंदगियां पल भर में काल के गाल में समा गईं।

​ वो 12 सेकंड: जब जयघोष चीख-पुकार में बदल गया

​हादसे से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो दिल को झकझोर देने वाला है। वीडियो में लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु हाथ जोड़कर "राधे-राधे" और "बांके बिहारी लाल की जय" के उद्घोष कर रहे थे। नाव की रफ्तार सामान्य लग रही थी, लेकिन अगले ही 12 सेकंड के भीतर एक जोरदार झटका लगा। नाविक ने नाव पर नियंत्रण खो दिया और नाव सीधे पीपा पुल के लोहे के खंभे से जा टकराई। टक्कर होते ही नाव एक तरफ झुक गई और देखते ही देखते पलट गई। जो श्रद्धालु अभी कुछ क्षण पहले कीर्तन कर रहे थे, वे अब अपनी जान बचाने के लिए यमुना की ठंडी और गहरी लहरों से जद्दोजहद कर रहे थे।

​चार बार कहा रुक जाओ, पर नाविक नहीं माना

​इस हादसे में बाल-बाल बचे लुधियाना के तनिष की आँखों में अभी भी खौफ साफ़ देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि नाव में क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे। नाव जैसे ही बीच मझधार में पहुँची, वह डगमगाने लगी थी। तनिष और अन्य श्रद्धालुओं ने नाविक से कम से कम चार बार विनती की कि वह नाव को किनारे लगा ले या रोक दे।

​हमने उससे बार-बार कहा कि नाव डगमगा रही है, इसे रोक दो। लेकिन नाविक ने एक नहीं सुनी। वह अपनी धुन में नाव चलाता रहा और जैसे ही हम पुल के पास पहुँचे, पानी के तेज बहाव ने नाव को सीधे खंभे की तरफ धकेल दिया। - तनिष (प्रत्यक्षदर्शी)

​यह बयान स्पष्ट करता है कि यदि समय रहते नाविक ने श्रद्धालुओं की बात मान ली होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

रेस्क्यू ऑपरेशन: अंधेरे में जिंदगी की तलाश
​हादसे के बाद घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों और मल्लाहों ने तुरंत पानी में छलांग लगाई। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन, PAC (प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी) और NDRF की टीमें मौके पर पहुँचीं

बचाव कार्य के लिए 25 मोटरबोट और लगभग 350 बचावकर्मी तैनात किए गए। यमुना का तेज बहाव और शाम होते-होते बढ़ता अंधेरा बचाव कार्य में बड़ी बाधा बना। प्रशासन ने जनरेटर और बड़ी लाइटों का इंतजाम किया ताकि रात भर सर्च ऑपरेशन जारी रहे। स्थानीय गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को पानी से बाहर निकाला।

​ अस्पताल का मंजर: टूटी सांसें और बिखरे सपने

​हादसे के बाद घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पतालों और रामकृष्ण मिशन अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुँचने से पहले ही एक महिला ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों के फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। अपनों को खोने वाले परिवारों का विलाप सुनकर अस्पताल का हर शख्स गमगीन था। कई श्रद्धालु ऐसे थे जो अपने छोटे बच्चों के साथ आए थे, और इस हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया।

लापरवाही के बड़े सवाल: जिम्मेदार कौन?
​यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा। नाव में क्षमता से ज्यादा लोग क्यों बैठाए गए? क्या घाट पर सुरक्षा मानकों की जांच करने वाला कोई नहीं था। नाव पर सवार किसी भी श्रद्धालु ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। नियमानुसार, प्रत्येक नाव में पर्याप्त लाइफ जैकेट होना अनिवार्य है। यमुना में चलने वाली कई नावें बिना पंजीकरण और फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रही हैं। क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी। पुल के पास पानी का बहाव अक्सर तेज होता है, वहाँ सुरक्षा जाल या गार्ड्स की तैनाती क्यों नहीं थी?

​हादसे की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी नाविक और नाव संचालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। परिजनों की सुविधा के लिए तत्काल प्रभाव से हेल्पलाइन नंबर (0565-2403200) जारी किए गए हैं।

​नंदगांव में होने वाले 'फूल बंगला' कार्यक्रम और संकीर्तन में शामिल होने आए इन श्रद्धालुओं को क्या पता था कि उनकी यह यात्रा अंतिम साबित होगी। जिन हाथों में मंजीरे और माला थी, वे अब अपनों की तलाश में प्रार्थना कर रहे हैं।

​वृंदावन का यह हादसा एक चेतावनी है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा और "चलता है" वाला रवैया नहीं बदलेगा, तब तक ऐसी मासूम जिंदगियां लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी। यमुना की लहरों ने आज जो जख्म दिए हैं, उन्हें भरने में सालों लग जाएंगे, लेकिन क्या प्रशासन इससे कोई सबक लेगा?

Category: Uttar pradesh


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