Published on April 12, 2026 | Views: 103
वृंदावन। भक्ति और आस्था के केंद्र ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में इन दिनों सेवायतों की हठधर्मिता के कारण एक प्राचीन और भव्य परंपरा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मंदिर के इतिहास में यह संभवतः पहली बार हो रहा है जब सेवायतों और मंदिर प्रबंधन समिति के बीच 'शुल्क' को लेकर उपजे विवाद के कारण ठाकुरजी का फूल बंगला नहीं सजाया गया। परिणामस्वरूप, आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी ने बिना फूल बंगले के ही भक्तों को दर्शन दिए।
मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रबंधन समिति ने पिछले दिनों फूल बंगला सजाने के शुल्क में भारी वृद्धि करते हुए इसे 1.51 लाख रुपये निर्धारित किया था। सेवायतों के भारी विरोध के बाद एक उच्चस्तरीय बैठक में इस राशि को घटाकर 1.01 लाख रुपये किया गया। इसके बावजूद सेवायत इस राशि को जमा करने को तैयार नहीं हैं।
आंकड़ों का गणित और आरोप
खबर के अनुसार, विवाद के पीछे के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।
पूर्व में सेवायत फूल बंगला सजाने के लिए मंदिर कोष में मात्र 15,000 रुपये जमा करते थे। सेवायत भक्तों से फूल बंगला सेवा के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये तक की मोटी धनराशि लेते हैं, लेकिन मंदिर के विकास के लिए तय किया गया एक लाख रुपये का शुल्क देने में आनाकानी कर रहे हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि सेवायत पूर्व में निर्धारित 15 हजार रुपये की मामूली राशि भी नियमित रूप से जमा नहीं करवा रहे थे।
शनिवार को नौवीं बार ऐसा हुआ जब सुबह 'राजभोग' और शाम को 'शयनभोग' सेवा के दौरान फूल बंगला नहीं सजाया गया। वृंदावन के स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर गहरा रोष है। भक्तों का कहना है कि सेवायतों के आपसी विवाद और आर्थिक हितों के कारण मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं को तोड़ा जा रहा है, जो कि धर्म और आस्था के विरुद्ध है।
Category: Dharm