वृंदावन यमुना त्रासदी: प्रशासन की लापरवाही और नाविकों की मनमानी ने ली 13 जानें, व्यवस्थाओं की खुली पोल

Published on April 12, 2026 | Views: 285

वृंदावन यमुना त्रासदी: प्रशासन की लापरवाही और नाविकों की मनमानी ने ली 13 जानें, व्यवस्थाओं की खुली पोल

वृंदावन: धर्मनगरी वृंदावन के केसी घाट पर हुआ भीषण नाव हादसा केवल एक 'दैवीय आपदा' नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनदेखी और स्थानीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता परिणाम है। रविवार को यमुना से दो और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या 13 पहुँच गई है। लेकिन इस त्रासदी के पीछे जो सच निकलकर सामने आ रहा है, वह बेहद चौंकाने वाला और आक्रोश पैदा करने वाला है।
​प्रशासन की नाक के नीचे 'मौत का व्यापार'
​हादसे के बाद यह कड़वा सच उजागर हुआ है कि यमुना के घाटों पर नाविकों की मनमानी लंबे समय से जारी थी। स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे नाविक श्रद्धालुओं से मनमाना किराया वसूल रहे थे। इतना ही नहीं, अधिक मुनाफे के लालच में नाव की तय क्षमता से कई गुना अधिक सवारियों को बिठाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर नावों को ओवरलोड किया जाता था, लेकिन घाटों पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अमले ने कभी इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई। इसी 'ओवरलोडिंग' ने अंततः एक हँसते-खेलते श्रद्धालुओं के समूह को मौत के मुँह में धकेल दिया।

​वृंदावन एक वैश्विक धार्मिक केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन और यमुना की आरती के लिए आते हैं। विडंबना देखिए कि इतनी बड़ी संख्या में फुटफॉल होने के बावजूद, प्रशासन के पास किसी भी जल-आपदा से निपटने के लिए कोई बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं था। घाटों पर न तो पर्याप्त लाइफ गार्ड्स थे, न ही आपातकालीन स्थिति के लिए रेस्क्यू बोट्स। लाखों की भीड़ का प्रबंधन करने वाला तंत्र यमुना की लहरों पर हो रही इस अवैध वसूली और असुरक्षित सफर से पूरी तरह आँखें मूंदे बैठा रहा।

​इस हादसे ने प्रशासन की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की भी कलई खोल दी है। जब नाव डूबी और लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, तब स्थानीय स्तर पर कोई पेशेवर टीम मौजूद नहीं थी। NDRF और SDRF की टीमों को गाजियाबाद से बुलाया गया, जिन्हें पहुँचने में कई घंटों का अत्यधिक समय लगा। इस देरी के कारण शुरुआती महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गए, जिनमें कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। सवाल यह उठता है कि क्या इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर एक स्थायी रेस्क्यू यूनिट का न होना प्रशासनिक विफलता नहीं है?

​रविवार को रेस्क्यू टीम ने लुधियाना निवासी डिंकी बंसल (21 वर्ष) और जगरांव के ऋषभ शर्मा के शव बरामद किए। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, यमुना को सात सेक्टरों में बांटकर अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश की जा रही है। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने अब 419 लाइफ जैकेट बांटने और नियमों को सख्त करने का दावा किया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह सजगता पहले दिखाई गई होती, तो आज कई घरों के चिराग न बुझते।
​पंजाब से आए परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे सवाल कर रहे हैं कि क्या आस्था के केंद्र पर सुरक्षा की गारंटी केवल कागजों तक ही सीमित है? फिलहाल, यमुना की लहरों में अपनों की तलाश जारी है और प्रशासन अपनी विफलताओं को ढंकने के लिए नए दिशा-निर्देशों का सहारा ले रहा है।

Category: Uttar pradesh


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