बांके बिहारी का 482वां प्राकट्य उत्सव, अपने आराध्य को बधाई देने के लिए उमड़ा जन सैलाब, ​भव्य 'बिहार पंचमी' शोभायात्रा में गूंजे 'जयकारे'

Published on November 25, 2025 | Views: 252

बांके बिहारी का 482वां प्राकट्य उत्सव, अपने आराध्य को बधाई देने के लिए उमड़ा जन सैलाब, ​भव्य 'बिहार पंचमी' शोभायात्रा में गूंजे 'जयकारे'

वृंदावन, भगवान श्री कृष्ण की नगरी श्री धाम वृंदावन का धार्मिक उत्साह मंगलवार को अपने चरम पर रहा, जब श्री बांके बिहारी मंदिर के 482वें प्राकट्य उत्सव, जिसे 'बिहार पंचमी' के नाम से जाना जाता है, में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वृंदावन में सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक यह उत्सव, ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के इस धरती पर प्रकट होने का उत्सव है।

​ ठाकुर जी के प्रकट उत्सव का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि इसी पावन दिन, महान संत स्वामी हरिदास जी ने श्री निधिवनराज में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को प्रगट किया था। इस ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर में विशेष रूप से हलवे के प्रसाद का भोग लगाया जाता है।

​इस दिन भव्य शोभायात्रा का आयोजन भी किया जाता है। इतिहासकार और मंदिर सेवायत प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, इस मौके पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। यह शोभायात्रा श्री बांके बिहारी जी के प्रकट होने के स्थान यानी निधि वन से शुरू होकर वृंदावन के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्री बांके बिहारी मंदिर पर आकर समाप्त होती है।

निधिवन मंदिर के सेवायत भीकचंद गोस्वामी ने बताया कि प्रातःकाल श्री बांके बिहारी लाल के प्राकट्य स्थल पर दूध , दही, घी, शहद, शर्करा के साथ साथ जड़ी बूटियों से अभिषेक किया गया। हजारो की संख्या में उपस्थित भक्त इस क्षण के गवाह बने। अभिषेक के पश्चात सुंदर वस्त्र धारण कराकर भव्य आरती का आयोजन किया गया। तत्पश्चात शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा में विभिन्न प्रकार के बैंड, भजन मंडली के साथ-साथ भक्तों के समूह ठाकुर जी का नाम संकीर्तन करते हुए चल रहे थे। नगर वासी अपने स्थान से खड़े होकर ठाकुर जी की इस शोभायात्रा का आनंद ले रहे थे। शोभायात्रा के अंत में स्वामी जी चांदी के डोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षाकर स्वागत किया गया। शोभायात्रा के दौरान भक्तगण उत्साह से 'श्री बांके बिहारी लाल की जय' के जयकारे लगा रहे थे, और उनके भजन-कीर्तन ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।

​गोस्वामी ने यह भी बताया कि इस विशेष दिन स्वामी हरिदास जी का डोला बांके बिहारी मंदिर पहुंचने के बाद ही आरती की जाती है। स्वामी हरिदास जी को विराजमान करने के उपरांत ठाकुर जी की आरती प्रारंभ होती है जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में भक्ति मंदिर में उपस्थित होते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन ठाकुर जी स्वयं स्वामी हरिदास जी की गोद में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। आज भक्तों ने अपने आराध्य को उनके प्राकट्य दिवस की बधाई भी दी।

Category: Dharm


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