जीसीसी के नए केंद्र के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश, मुंबई राउंडटेबल में उद्योग जगत ने दिखाई गहरी रुचि

Published on November 29, 2025 | Views: 129

जीसीसी के नए केंद्र के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश, मुंबई राउंडटेबल में उद्योग जगत ने दिखाई गहरी रुचि

इन्वेस्ट यूपी ने शुक्रवार को ताज सांताक्रूज़, मुंबई में उच्च-स्तरीय जीसीसी राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों, वैश्विक सेवा प्रदाताओं और वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के उभरते हब के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं, नीतिगत ढांचे और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को प्रदर्शित करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव तथा वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी मिशन के नोडल अधिकारी श्री आलोक कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश जीसीसी के लिए दुनिया के सबसे ज़्यादा कॉम्पिटिटिव डेस्टिनेशन में से एक बनने की स्थिति में है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, आईबीएम, जेपी मॉर्गन, टेलीपरफॉर्मेंस और टीसीएस जैसी अग्रणी कंपनियां पहले से ही नोएडा–ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में संचालन कर रही हैं, जिससे राज्य का आईटी और आईटी आधारित सेवाओं का इकोसिस्टम मजबूत बना है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सर्विस-सेक्टर के निवेशकों के लिए एक बहुत ही आकर्षक प्रोत्साहन-लाभ प्रदान करता है, जिसमें 30-50% लैंड सब्सिडी, संचालन लागत में भी 20% की सब्सिडी उपलब्ध हैं, जिसमें लीज रेंटल, इंटरनेट बैंडविड्थ और विद्युत मूल्य शामिल है।

प्रमुख सचिव ने आगे कहा कि राज्य सरकार एक हब-एंड-स्पोक जीसीसी ऑपरेटिंग मॉडल को बढ़ावा दे रही है, जिससे कंपनियां विशेष कौशल का सदुपयोग कर सकें, कम लागत का लाभ प्राप्त कर सकें और संचालन की दक्षता बढ़ा सकें। इस मॉडल के अंतर्गत नोएडा–ग्रेटर नोएडा मुख्य केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, जबकि लखनऊ मिड-टियर जीसीसी सिटी के रूप में उभर रहा है। आगरा, कानपुर और मेरठ सैटेलाइट केंद्रों के रूप में विकसित किए जा रहे हैं, वहीं गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज को आने वाले आउटसोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कौशल व प्रतिभा के विषय में, उन्होंने कहा कि प्रदेश की 56% जनसंख्या कार्यशील ग्रुप में है, हर वर्ष 2 लाख से ज़्यादा स्टेम (STEM) ग्रेजुएट होते हैं और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 15 लाख से ज़्यादा प्रशिक्षित युवाओं के साथ उत्तर प्रदेश में टेक्नोलॉजी, एनालिटिक्स, डिजिटल इंजीनियरिंग और सर्विस-सेक्टर के लिए भारत के सबसे विशाल और सबसे कम लागत का टैलेंट पूल उपलब्ध है।

श्री कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार बिज़नेस, वित्तीय सेवाओं व बीमा, हेल्थकेयर, डिजिटल सेवाओं, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और प्रिसीज़न टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जीसीसी को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य का सुधार-चालित शासन, प्रतिस्पर्धी लागत और मजबूत नीतिगत ढांचा वैश्विक उद्यमों के लिए राज्य को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहे हैं।

इससे पहले सत्र की शुरुआत इन्वेस्ट यूपी के महाप्रबंधक-निवेश प्रोत्साहन, श्री अनिरुद्ध क्षत्रिय द्वारा एक प्रस्तुतीकरण से हुई, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के तेज़ी से बढ़ते हुए डिजिटल और औद्योगिक परिदृश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े सुधारों, ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और कुशल श्रमशक्ति की उपलब्धता के कारण राज्य में वैश्विक कंपनियों की तरफ़ से गंभीर रुचि व्यक्त की जा रही है।

राउंडटेबल में कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रदेश में जीसीसी परिदृश्य में उभरते अवसरों पर अपने विचार साझा किए। इनमें देबप्रिया मुखर्जी (ग्रुप जीएम, टीसीआई), दिनेश पटेल (मुख्य वित्तीय अधिकारी, शक्ति पंप्स), लक्ष्मी अय्यर (एसोसिएट डायरेक्टर, डेलोइट), ललित कत्याल (हेड – बिजनेस फाइनेंस, टेक महिंद्रा), सत्य महापात्रा (कार्यकारी निदेशक, डेलोइट), उत्पल अशर (एसोसिएट पार्टनर, आईबीएम कंसल्टिंग), राजेश भोगावल्ली (अध्यक्ष – आपूर्ति श्रृंखला और स्थिरता, ईपीएल लिमिटेड), धवल अग्रवाल (कार्यकारी निदेशक – रणनीति, इंडोस्पेस), रवनीत गिल (सीईओ, सहाना ग्रुप), अभिनव सुरेश (उपाध्यक्ष, लोकस), विनेश तेजवानी (निदेशक, वर्ल्डस्पेस इंडस्ट्रियल एंड लॉजिस्टिक्स पार्क प्राइवेट लिमिटेड), क्रुणाल शाह (निदेशक, सिएट लिमिटेड), कुमार सुब्बियाज (कार्यकारी निदेशक, सिएट लिमिटेड), जितेंद्र कोरे एंड ट्रांसफॉर्मेशन, डेलॉइट) और तरुण भार्गव (एडवाइजर) मौजूद रहे।

Category: Business


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