Published on January 1, 2026 | Views: 501
पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा का जन्मोत्सव को ‘वात्सल्य दिवस’ के रूप में वात्सल्य ग्राम में पूर्ण श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया।
संविद गुरुकुलम् गल्र्स सैनिक स्कूल के सभागार में आयोजित हुआ। कड़कड़ाती ठण्ड के बीच देश भर से पधारे उनके शिष्यगणों एवं परमशक्ति पीठ के सहयोगियों ने अपने श्रद्धासुमन उनके श्रीचरणों में समर्पित करते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ प्रकट कीं।
महोत्सव का शुभारंभ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
सरस्वती वन्दना के पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वैशिष्ट्यम एवं बी टी टी ए की छात्राओं ने महाभारत की संक्षिप्त नृत्य नाटिका के माध्यम से द्रौपदी की विवशता, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनके लाज बचाने एवं फिर दुःशासन वध के बाद स्त्री सशक्तिकरण का संदेश दिया।
कृष्णा ब्रह्मरतन विद्या मन्दिर की छात्राओं ने भगवान शिव पर आधारित नृत्य नाटिका से वातावरण को भावविभोर कर दिया लोगों तालियों से हाल गूँजने लगा।
ऑस्ट्रेलिया निवासी साहित्यकार श्रीमती सोमा नायर ने अपनी कविता के माध्यम से दीदी माँ जी का यशोगान करते हुए भारत की स्त्री शक्ति के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया।
पाकिस्तान पीड़ित हिन्दू समाज को भारत में बसाने के लिए महत्वपूर्ण कर रहे जयपुर के ख्यात चिकित्सक डाॅ.ओमेन्द्र रत्नू ने माँ के विभिन्न भूमिकाओं के प्रति अपनी अत्यन्त ही मनोहारी "मेरे मनोभाव" वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से पूज्या दीदी माँ जी के चरणों में अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुए उन्हें जन्मोत्सव की बधाई प्रदान की।
इसके पश्चात् दीदी माँ जी के समग्र जीवन दर्शन को प्रस्तुत करते हुए एक वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई।
सिरसा से पधारे हुए विश्वविख्यात भजन गायक श्री किशन भैया के भजनों ने वातावरण को राधामय कर दिया।
परमशक्ति पीठ के सहयोगी एवं प्रख्यात शिक्षाविद् श्री राजीव गुप्ता के आगरा में संचालित होने जा रहे शिक्षाकेन्द्र ‘संध्या गुरुकुलम्’ के ब्रोशर का विमोचन भी पूज्या दीदी माँ जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि -‘हमने देखा कि लोग किसी की काया का वध कर देते हैं। लोग किसी के प्रति रुष्ट हो जाते हैं तो उसको कहते हैं कि दिल करता है थप्पड़ मार दें, दिल करता है गोली से भून दें। इतना क्षुद्र विचार भी आता है द्वेष की वजह से। एक बैर होता है कि वह शरीर ही खत्म करना चाहता है लेकिन एक और तल पर भी बैर या प्रेम होता है। वो मन के तल पर होता है। हमने शरीर के तल पर तो देखा कि सास पहले बहू को जलाती थी अब बहुए कुछ अलग करामात करती हैं। पहले के समय में वो स्टोव बहू को ही पता नहीं क्यों जलाता था, सास, ननद को कैसे छोड़ देता था। अब वो उसकी दूसरी प्रतिक्रिया हो रही है। तो ये तो हमने बहुत सुना है और यहीं तक नहीं, अगर त्रेता युग या द्वापर युग की बात करें तो वहां भी तो हम देख रहे हैं कि उस दृष्टि से अगर हम आकलन करें तो सुग्रीव को बाली के विरुद्ध या बाली को सुग्रीव के विरुद्ध देखते ही हंै। विभीषण और रावण की कोई सम्मति आपस में बनी ही नहीं। यह भी देखते हैं कि पिता कैसे पुत्र का शत्रु बनता है। वो हम लोगों ने हिरण्यकश्यप को देखा कि प्रहलाद का ही वो शत्रु हो गया। अत्याचारी का जब अत्याचार बढ़ जाता है तो घर से ही क्रांति हो जाती है। प्रहलाद क्रांति के स्वर की तरह है। उसकी रक्षा के लिए नरसिंह भगवान स्वयं प्रकट हो गए। लेकिन हम देखते हैं कि आपने मन से किसी को प्रेम किया या मन से उस प्रेमी ने आपको विचित्र से धर्मसंकट में डाला तो आप मन से भारी आहत होते हैं। पिता पुत्र के साथ जब बदतमीजी करता है इससे बड़ा कष्ट मन में किसी पिता को नहीं हो सकता।
मनसा-वाचा-कमणा हम एक नहीं रह पाते। यह थोथा आदर्शवाद है। कोई प्रवचनों से बदल नहीं जाएगा। जब आपकी आंतरिक ऊर्जा का उर्ध्वगमन होगा, अपनी आंतरिक ऊर्जा का सम्मिलन करके आपकी शक्ति शिव से मिलेगी, तभी आप आंतरिक आनंद से भरेंगे। फिर आपके भीतर से जो निकलेगा वो सच्चा होगा, पूर्ण होगा आनंददायी होगा। आडंबर पाखंड हमको बोझिल करते हैं और जिंदगी की सच्चाई हमको हल्का-फुल्का करती है।’
वात्सल्य दिवस के अवसर पर संजय भैया, साक्षी चैतन्य सिन्धु, साध्वी शिरोमणि, स्वामी सत्यशील, रवि कान्त गर्ग वृन्दावन के सन्त मण्डल से महामंडलेश्वर स्वामी श्री राधाप्रसाद देव जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्री आदित्यानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्री रामदास जी महाराज, महंत श्री मोहिनीबिहारी शरण जी महाराज, श्री सुतीक्ष्णदास जी महाराज, महंत श्री देवानंद जी महाराज, महंत श्री दशरथ जी महाराज, स्वामी देवानंद परमहंस जी महाराज, श्री सौरभ गौड़, श्री संजय भैयाजी, श्री, रविकान्त गर्ग,आशीष गुप्ता, निवेदिता, आई.सी.अग्रवाल, श्री राजीव गुप्ता, श्री अशोक सरीन, डाॅ.जनक आनन्द, श्री ऋषव अवस्थी, आई.जी.एच.के.शर्मा, श्रीमती वन्दना तिवारी एवं श्रीमती सीमा शर्मा, मीनाक्षी अग्रवाल सहित अनेक गणमान्यजन इस आयोजन में सम्मिलित हुए।
संचालन डॉ उमाशंकर राही ने किया।
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