Published on October 13, 2026 | Views: 229
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि भवन, लखनऊ में तीन प्रमुख विषयों—प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) एवं राज्य कृषि विकास योजना (SADP), विण्ड्स (मौसम सूचना नेटवर्क डाटा प्रणाली) तथा 'विकसित उत्तर प्रदेश 2047' के कृषि रोडमैप की प्रगति की विस्तृत समीक्षा बैठक की। उन्होंने संबंधित योजना अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ किसानों तक निर्बाध, पारदर्शी और त्वरित रूप से पहुंचाने के लिए वे कार्यालयों तक सीमित न रहकर स्वयं धरातल पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य हर योजना का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाना और प्रदेश के कृषि विकास को नई गति देना है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) तथा राज्य कृषि विकास योजना (SADP) की वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि पीएम-आरकेवीवाई के समस्त घटकों के लिए 1364.01 करोड़ रुपये के केंद्रीय आवंटन के सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा 680.32 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं, जिसमें से अब तक 447.65 करोड़ रुपये (66 प्रतिशत) व्यय किए जा चुके हैं। इसके मुख्य घटक आर०के०वी०वाई (DPR) में कृषि विभाग ने 140.19 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष 122.47 करोड़ रुपये (87 प्रतिशत) खर्च कर अग्रणी प्रगति दर्ज की है, जबकि गन्ना, बीज विकास निगम व शोध संस्थानों में व्यय की गति धीमी होने पर सुधार के निर्देश दिए गए। वहीं वर्ष 2025-26 तक के 117.97 करोड़ रुपये के लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों (UC) के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, शत-प्रतिशत राज्य पोषित 'राज्य कृषि विकास योजना' (SADP) के अंतर्गत स्वीकृत 62.95 करोड़ रुपये के सापेक्ष 30.61 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जिसमें कृषि विभाग ने 21.49 करोड़ रुपये और उद्यान विभाग ने 8.55 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। कृषि मंत्री ने अन्य विभागों को स्वीकृत परियोजनाओं पर कार्य तेज करने तथा पूर्व वर्षों के 54.51 करोड़ रुपये के लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों को समयबद्ध रूप से निस्तारित करने के निर्देश दिए।
मौसम की सटीक जानकारी किसानों तक पहुंचाने और त्वरित फसल क्षतिपूर्ति निर्धारण हेतु संचालित विण्ड्स (WINDS) कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कार्यदायी संस्था मैसर्स स्काईमेट वेदर सर्विसेज प्रा० लि० की अत्यधिक सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया।
बैठक के तीसरे सत्र में 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के दृष्टिगत 'विकसित उत्तर प्रदेश 2047' हेतु कृषि रोडमैप पर डिलाइट टीम और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कृषि मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, मृदा स्वास्थ्य सुधार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण व विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देकर वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में देश का सर्वोत्तम प्रदेश बनाने की दीर्घकालिक रणनीति पर सहमति बनी।
इस समीक्षा बैठक में माननीय कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव कृषि एम. के. शनमुगा सुंदरम, विशेष सचिव कृषि संजीव रंजन, विशेष सचिव कृषि ओपी वर्मा, विशेष सचिव श्री टीके शिबू, निदेशक कृषि त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण की निदेशक श्रीमती कनीज फातिमा, अपर निदेशक श्री योगेश प्रताप सिंह, संयुक्त निदेशक ब्यूरो अखिलेश कुमार सिंह, सहित डिलाइट टीम एवं संबंधित योजनाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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