Published on November 5, 2026 | Views: 127
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, समयबद्ध भुगतान तथा पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में खाद्यान्न खरीद एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी, सुगम और जवाबदेह बनाया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि किसान की मेहनत का मूल्य सीधे उसके बैंक खाते में पहुँचे और गरीब के हिस्से का पूरा राशन उसे प्राप्त हो। इन व्यवस्थाओं में अनियमितता, घटतौली अथवा अवैध वसूली पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मनोज पाण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री की सहमति एवं मार्गदर्शन में धान क्रय नीति का पूर्व वर्ष की भाँति सरलीकरण किया गया है, जिससे किसानों को उपज बेचने में व्यावहारिक एवं प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। ऑनलाइन किसान पंजीकरण, भूलेख पोर्टल का ई-उपार्जन पोर्टल से एकीकरण तथा ई-पॉप मशीनों से आधार आधारित बायोमीट्रिक सत्यापन ने खरीद व्यवस्था को सुदृढ़ किया है। इन व्यवस्थाओं से वास्तविक किसानों से सीधे खरीद सुनिश्चित करने और बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिली है।
खाद्य एवं रसद मंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य कॉमन श्रेणी के लिए ₹2,441 तथा ग्रेड-ए के लिए ₹2,461 प्रति कुन्तल निर्धारित है। प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष 5,047 क्रय केन्द्र संचालित हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 12 अक्टूबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 01 नवम्बर, 2026 से खरीद प्रारम्भ हो चुकी है। अद्यतन 7,230 किसानों से 40,447 मीट्रिक टन धान खरीद कर ₹50 करोड़ का भुगतान किया गया है।
उन्होंने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2012दृ13 से 2016-17 तक 14.87 लाख किसानों से 123.61 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर ₹17,190.85 करोड़ का भुगतान किया गया था। इसके सापेक्ष वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 80.39 लाख किसानों से 528.39 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर ₹99,733.10 करोड़ का भुगतान किया गया। वर्ष 2025-26 में 60 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य से अधिक, रिकॉर्ड 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई तथा 10.53 लाख किसानों को ₹14,883 करोड़ का भुगतान किया गया।
मनोज पाण्डेय ने बताया कि गेहूँ खरीद के माध्यम से भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का व्यापक लाभ उपलब्ध कराया गया है। रबी विपणन वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक 19.02 लाख किसानों से 94.38 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीद कर ₹12,808.67 करोड़ का भुगतान किया गया था। वहीं, वर्ष 2017-18 से 2026-27 तक 55.89 लाख किसानों से 265.82 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीद कर ₹51,550.10 करोड़ का भुगतान किया गया है।
खाद्य एवं रसद मंत्री ने कहा कि धान और गेहूँ के साथ श्री अन्न एवं मोटे अनाज उत्पादक किसानों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाया जा रहा है। वर्तमान वर्ष में बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,900 प्रति कुन्तल है। इसके लिए 2.20 लाख मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 285 क्रय केन्द्र संचालित हैं। अद्यतन 2,244 किसानों से 8,716 मीट्रिक टन बाजरा खरीद कर ₹20.82 करोड़ का भुगतान किया गया है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 7.14 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीद कर 1,48,718 किसानों को ₹1,854 करोड़ का भुगतान किया गया।
उन्होंने बताया कि हाइब्रिड ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹4,023 प्रति कुन्तल निर्धारित है। ज्वार खरीद के 50 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 95 क्रय केन्द्र संचालित हैं। अद्यतन 106 किसानों से 347 मीट्रिक टन ज्वार खरीद कर ₹93 लाख का भुगतान किया गया है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 1.04 लाख मीट्रिक टन ज्वार खरीद कर 26,972 किसानों को ₹363.35 करोड़ का भुगतान किया गया।
इसी प्रकार, मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,410 प्रति कुन्तल निर्धारित है। इसके लिए 15 हजार मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 120 क्रय केन्द्र संचालित हैं। वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक 1.74 लाख मीट्रिक टन मक्का खरीद कर 40,322 किसानों को ₹349.06 करोड़ का भुगतान किया गया है।
मनोज पाण्डेय ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसान पंजीकरण एवं सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। किसान अपनी फार्मर आईडी में उपलब्ध विवरण से संतुष्ट होने पर उसी के आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं। विवरण से असंतुष्ट होने की स्थिति में गत वर्ष की प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण कराकर उपज का विक्रय कर सकते हैं। अद्यतन 1.40 लाख से अधिक किसानों ने धान एवं मोटे अनाज की बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। खरीदी गई उपज का भुगतान अधिकतम 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक वित्तीय प्रबन्धन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सम्बन्ध में खाद्य एवं रसद मंत्री ने कहा कि पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। राशन वितरण में किसी भी प्रकार की घटतौली स्वीकार नहीं की जाएगी। जिलों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिला पूर्ति अधिकारी अथवा निरीक्षक द्वारा किसी उचित दर विक्रेता से अवैध धन वसूली की शिकायत मिलने पर सम्बन्धित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रत्येक मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि उचित दर विक्रेताओं का कमीशन दीपावली से पूर्व उनके बैंक खातों में भेजने के निर्देश दे दिए गए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारु संचालन में उचित दर विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके देयकों का समय से भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।
मनोज पाण्डेय ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुविधाजनक रूप से संचालित करने के लिए प्रदेश में 8,753 अन्नपूर्णा भवन बनकर तैयार हो चुके हैं तथा 2,573 भवन निर्माणाधीन हैं। अन्नपूर्णा भवनों पर लाभार्थियों के बैठने तथा पेयजल, गुड़ एवं पेठे की व्यवस्था के लिए जिलों को धनराशि भेजी जा चुकी है। यह व्यवस्था जिलाधिकारियों की देखरेख में सुनिश्चित की जाएगी।
खाद्य एवं रसद मंत्री ने कहा कि प्रदेश की मण्डियों में किसानों तथा श्रमिक बहुल एवं अत्यन्त गरीब क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों के लिए अन्नपूर्णा रसोई के माध्यम से मात्र पाँच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस पहल से किसानों, श्रमिकों एवं जरूरतमंदों को अत्यन्त सस्ती दर पर भोजन की सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि खरीद एवं वितरण व्यवस्था की जमीनी स्थिति परखने के लिए उनके द्वारा औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। यह क्रम निरन्तर जारी रहेगा और प्रत्येक सप्ताह औचक निरीक्षण किया जाएगा, जिससे व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी तथा जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
मनोज पाण्डेय ने कहा कि किसान को उपज का उचित मूल्य, गरीब को पूरा राशन और जरूरतमंद को सुलभ भोजन उपलब्ध कराना विभाग का संकल्प है। जनहित से जुड़ी इन सेवाओं में लापरवाही अथवा अनियमितता मिलने पर जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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