Published on September 23, 2025 | Views: 584
दीनदयाल धाम। विश्व आयुर्वेद दिवस के अवसर पर दीनदयाल कामधेनू गौशाला फार्मेसी, दीनदयाल धाम में एक भव्य और ज्ञानवर्धक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया गया। यह दीप प्रज्वलन दीनदयाल धाम के निदेशक सोनपाल भाई साहब द्वारा संपन्न हुआ।
भगवान धनवंतरी से जुड़ा अमृत ज्ञान
गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रांत ग्राम विकास प्रमुख आर्येंद्र भाई साहब ने अपने संबोधन में आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने धनवंतरी रूप में अवतार लेकर अमृत कलश के साथ मानवता को आयुर्वेद का अनमोल ज्ञान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य की परिभाषा केवल शारीरिक तंदुरुस्ती तक सीमित नहीं रखी, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को स्वास्थ्य का आधार बताया।
आर्येंद्र जी ने त्रिदोष सिद्धांत – वात, पित्त और कफ – की व्याख्या करते हुए बताया कि इनका संतुलन ही पूर्ण स्वास्थ्य की कुंजी है। उन्होंने औषधियों के वर्गीकरण, रोगों के निदान की विधियों और जीवनशैली में आयुर्वेदिक सिद्धांतों के महत्व पर भी गहराई से चर्चा की।
आयुर्वेद – हर घर की रसोई में
अपने वक्तव्य के अंत में आर्येंद्र भाई साहब ने कहा, “आयुर्वेद केवल औषधियों तक सीमित नहीं है। हमारे घर की रसोई में ही स्वास्थ्य का खजाना छिपा है। यदि हम घरेलू मसालों, जड़ी-बूटियों और पारंपरिक खानपान की जानकारी रखें और उनका सही तरीके से उपयोग करें, तो जीवन को निरोग और संतुलित बनाया जा सकता है।”
विशेष अतिथि और गणमान्यजन रहे उपस्थित
गोष्ठी में कई आयुर्वेद विशेषज्ञ और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से वैद्य मदन मोहन उपाध्याय, गंगा प्रसाद पाठक, नीरज तरकर, फार्मेसी प्रबंधक संजीव खालौर सहित राम, ईश्वरचंद, प्रशांत, रेखा, सुशीला, रिंकी, संजू, श्यामा, मोना, सीमा, अनीता, कमलेश, ब्रजमोहन, छोटेलाल, बिजेंद्र आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
स्वास्थ्य जागरूकता का संकल्प
गोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आयुर्वेदिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाया जाए और लोग आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी अपनाकर एक स्वस्थ और संतुलित जीवन व्यतीत करें।
Category: Uttar pradesh