Published on August 5, 2026 | Views: 243
अंधेर नगरी बेबूझराजा बाली कहावत की तर्ज पर चल रही सैंपऊ तहसील मैं आखिर तहसीलदार के रीडर वीरेंद्र को रिश्वत लेते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है ब्यूरो की कार्यवाही से तहसील में हड़कंप मच गया तहसीलदार प्रवीण गुप्ता के रीडर वीरेंद्र द्वारा परिवादी से जमीनकेविभाजन के लिए 18000 रुपए की मांग की थी जिनमें से₹10000 रुपए पहले₹4000 आज तथाशेष रुपए बाद में देना तय किया गया परिवादी ने मालौनी खुर्द में आठबीघा जमीन खरीदी थी जिसका नामांतरण होने के बाद बंटवारे के लिए उपखंड अधिकारी महोदय ने तहसीलदार प्रवीण गुप्ता को कार्यवाही हेतु नामित किया था रिश्वत की शिकायत परिबादी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्यालय में की जिसका सत्यापन करने के बाद शिकायत सही पाई गई योजना अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीएसपी प्रेमचंद मीणा ने रिश्वतखोर रीडर को रंगे हाथो गिरफ्तार कर लिया जिसे न्यायालय में पेश किया जाएगा
तहसील में भ्रष्टाचार की शिकायते लंबे समय से की जाती रही है बरसों से तहसील में लोग स्वयं की जमीनों का दाखिला खुलवाने चक्कर काट रहे हैं किंतु बिना सुविधा शुल्क के दाखिला तक होना टेडी खीर साबित हो रहा है यहां तककि विरासत में हिस्से में आई जमीनों का सादा कागज पर वसीयत लिखवा कर न सिर्फ रजिस्ट्री कर दी गई बल्कि हाथो हाथ दाखिला खुलवा कर अगले दिन दान पत्र भी लिखवा दिया गया यह प्रकरण तब सुर्ख़ियों में आया जब जमीन मालिकों को इसका पता लगा तथा उन्होंने न्यायालय की शरण ली और सब तो दूर तहसील में जमीनों पर लगने वाला स्टांप शुल्क जैसे राज्य सरकार की आमदनी माना जाता है उसमें भी कम स्टांप लगवा कर जमीनों के खरीदारों से मोटी रकमबसूलने का खेल भी लंबे अरसे से चल रहा है जो की जांच का विषय है कार्यरत पटवारी एवं बाबुओं ने सुविधा शुल्क लेने के लिए निजी व्यक्तियों को किराए पर ले रखा है जो सिर्फ लेनदेन का काम ही करते हैं इसका अर्थ यह नहीं है की तहसील प्रशासन को जानकारी नहीं है किंतु बहती गंगा में हाथ धोने में कोई क्यों पीछे रहे सरकार जहांएक और पारदर्शी एवं जवाब दे ह प्रशासन एवं नौकरशाही का दावा करती है वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार की बानगी देखनी हो तो सैंपऊ तहसील से अच्छी जगह कहां मिल सकती है
Category: Rajasthan