Published on August 20, 2026 | Views: 154
मथुरा। विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में सामने आईं करीब 15 प्रमुख घटनाओं ने मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं श्रद्धालुओं से मारपीट के मामले सामने आए तो कहीं सेवायत और सुरक्षा कर्मियों के विवाद ने व्यवस्था की पोल खोल दी। मंदिर के आसपास जर्जर भवन से श्रद्धालुओं के घायल होने की घटना के बाद भी सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।
मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन कराने के लिए जिला प्रशासन के साथ हाई पावर कमेटी भी गठित है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं इस बात का संकेत दे रही हैं कि व्यवस्था बनाने और उसे जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने के बीच बड़ा अंतर है।
आठ महीने में 15 प्रमुख घटनाओं ने उठाए सवाल
एक जनवरी से अगस्त तक मंदिर और उसके आसपास अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। नववर्ष पर भीड़ के दौरान अव्यवस्थाओं और जेबकतरों की शिकायतों से लेकर सेवायत-श्रद्धालु विवाद, सुरक्षा कर्मियों से झड़प, दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद, मंदिर प्रबंधन को लेकर टकराव और जर्जर भवन का छज्जा गिरने जैसी घटनाएं चर्चा में रहीं।
फरवरी में एक सेवायत द्वारा सेवानिवृत्त सेना अधिकारी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया, जिसमें गिरफ्तारी तक हुई। वहीं मंदिर की दर्शन व्यवस्था और जगमोहन को लेकर सेवायतों और प्रबंधन के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला ताला लगाए जाने तक पहुंच गया।
जून में मंदिर के निकट जर्जर भवन का छज्जा गिरने से कई श्रद्धालु घायल हो गए। यह घटना विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मंदिर क्षेत्र में जर्जर भवनों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
जुलाई में महिला पुलिसकर्मी और श्रद्धालु के बीच कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद भी श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार और पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए।
हाई पावर कमेटी पर भी सवाल
श्री बांके बिहारी मंदिर कीpp व्यवस्थाओं के लिए बनाई गई हाई पावर कमेटी का उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दर्शन व्यवस्था में सुधार करना है। लेकिन लगातार सामने आ रहे विवादों से सवाल उठ रहा है कि कमेटी की बैठकों में लिए जाने वाले निर्णयों का वास्तविक क्रियान्वयन कितना हो रहा है।
यदि लगातार घटनाएं हो रही हैं तो सवाल यह भी है कि पिछली घटनाओं से सबक लेकर स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही। भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की भूमिका, सेवायतों और श्रद्धालुओं के बीच विवाद रोकने तथा मंदिर के आसपास जर्जर भवनों की निगरानी जैसे विषयों पर ठोस कार्ययोजना की जरूरत है।
जिला प्रशासन की निगरानी पर भी उठ रहे प्रश्न
बांके बिहारी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी केवल भीड़ के समय पुलिस बल लगाने तक सीमित नहीं हो सकती। मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा ऑडिट, भवनों का सर्वे, आपातकालीन निकासी, सीसीटीवी निगरानी, भीड़ की क्षमता के अनुसार प्रवेश नियंत्रण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
लगातार घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिला प्रशासन ने प्रत्येक घटना के बाद क्या समीक्षा की और समीक्षा के आधार पर कितने स्थायी सुधार किए गए।
कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं रुक रही घटनाएं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी घटना में पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारी होती है, तो उसके बाद उसी प्रकार की दूसरी घटना सामने क्यों आती है? क्या हर घटना के बाद रूट कॉज एनालिसिस कर जिम्मेदारी तय की जाती है? क्या मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाती है?
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतार, भीड़, धक्का-मुक्की और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय घटना रोकने की व्यवस्था जरूरी है।
अब कार्रवाई नहीं, जवाबदेही की जरूरत
आठ महीने में करीब 15 प्रमुख घटनाओं का सामने आना किसी भी धार्मिक स्थल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और हाई पावर कमेटी पिछले आठ महीनों की सभी घटनाओं की एक साथ समीक्षा कर सार्वजनिक रूप से बताए कि किस मामले में क्या कार्रवाई हुई, कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और कौन-कौन से स्थायी सुधार किए गए।
बांके बिहारी मंदिर केवल मथुरा-वृंदावन ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में व्यवस्था में चूक को सामान्य घटना मानने के बजाय जिम्मेदारी तय करना और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
Category: Uttar pradesh